Sunday, March 13, 2011

"सफलता"

सफल होना है तो असफलताओं से न घबराओ
कुछ करना है जीवन में तो आत्मविश्वास जगाओ

काम करो इतना ना करो परवाह पसीने की
मेहनत ही रंग लाती है ये बात सुनलो जीवन की

याद करो सिकन्दर जो बना जगत में महान
ठान लिया जब उसने तो ली भारत पर कमान

जो भी करो जीवन में लक्ष्य तुम बनाओ
उस लक्ष्य पर नजर रखकर आगे बढ़ते जाओ

पाओगे निश्चित सफलता जब द्रढ़-निश्चय होगा
कहती है "सरू"मंजिल जीवन में वो ही प्राप्त करेगा
~स्वाति(सरू)जैसलमेरिया

एक सिंह की सच्ची प्रेम कहानी (Part - I)

ये क्या कमाल हो गया ये क्या बेमिसाल हो गया
हमारे शब्दों की लेखनी से किसीको हमसे प्यार हो गया
कुछ शब्द उन्होंने सांधे कुछ शब्द हमने बाँधे
शब्दों का ये रूप हमारा केसे बेहिसाब हो गया
ये क्या कमाल हो गया ये क्या बेमिसाल हो गया

हंसी ख़ुशी की दुनिया थी मस्ती का वो आलम था
कागज की वो कश्ती थी नदी का वो किनारा था
न दुनिया की चिंता थी न मन में द्वेष हमारे था
अल्हड सा वो बचपन मेरा किना रूप न्यारा था
ख़ुशी के उन्ही शब्दों में जाने क्या कमाल हो गया
ये क्या कमाल हो गया ये क्या बेमिसाल हो गया

कुछ समझ न पाए वो कुछ समझ न पाए हम
किन शब्दों ने खेल रचा कुछ जान न पाए हम
संभले तभी हमपर क्या खुमार हो गया
ये क्या कमाल हो गया ये क्या बेमिसाल हो गया

कलम हमारी छुट गयी शब्द हमारे रूठ गये
तभी उन्होंने हमें सभाला वर्ना हम तो ठहर गये
शब्द उन्ही के सुन सुन कर, लिखने का आसार हो गया
उफ़ ये क्या कमाल हो गया. उफ़ ये क्या बेमिसाल हो गया

पहले उनको हमारे लेखन से प्यार था
अब उनको हमसे प्यार हो गया
और हमको उनसे प्यार हो गया....!!

एक सिंह की सच्ची प्रेम कहानी (Part - II)

वो सफ़र सुहाना था,दिल को बहुत लुभाता था
अनजाने से प्रेम को न समझ में पाता था
अजीब सी वो कशिश थी धड़कन ने जोर मारा था
धीरे धीरे प्रेम मेरा मुलाकात में बदल गया

उफ़ ये कमाल हो गया अनजाने में हमे प्यार हो गया

वो नजर का मिलना ,दिल की धड़कन का बढ़ना
वो उनका शर्माना शरमा के यूँ मुस्कुराना
समय का थम सा जाना उन्हें निहारते रहना
योवन का वो खिला खिला उन पर हुस्ने वार हो गया

उफ़ ये कमाल हो गया अनजाने में हमे प्यार हो गया

जब भी मिलते उनसे,क्यों धड़कन बढ़ जाती थी
दिल की बाते क्यों हमारे होंठो पे न आती थी
छूकर उनके हाथो को क्यों मन सिहर सा जाता था
क्या होता है ये प्यार ,बस दिल ये ही कहता था
कुछ समझ पाए उससे पहले दिल हमारा उस पार हो गया

उफ़ ये कमाल हो गया अनजाने में हमे ये कैसा प्यार हो गया

एक सिंह की सच्ची प्रेम कहानी (Part - III)

प्यार की वो कसमे, वो बंधन भी अनोखा था
हर पल की खबर थी हमको, क्या अजीब कशिश था
था महकता योवन उनका ,थी खुशबू उस रूप में
डर था कही बहक न जाये, उम्र के इस दौर में
पर मन में प्रेम इतना था उनपर बेमिसार हो गया

उफ़ ये कमाल हो गया ये केसा प्यार हो गया

कई मशक्कत के बाद, हमारी मुलाक़ात होती थी
बहुत कुछ चाहते थे कहना, पर जुबां क्यों बंद हो जाती थी
हर बार बस उन्हें निहार- निहार कर,वक़्त सिमट सा जाता था
उनका रूठना और मनाना, बस इतना ही हो पाता था
आज कही जीवन का ये पल, उनपर खुमार हो गया

उफ ये कमाल हो गया.............

आज साँसे थमी हुई थी, पलके उनकी झुकी हुई थी
कह रहा दिल कहदु ,आज मन की सारी बातें
अब सिमट जाए हम तुम, एक रस्म में जेसे धागे
कह दिया दिल ने आज उसे, हमें तुमसे प्यार हो गया

उफ़. ये कमाल हो गया...........

उनकी धड़कन रुक गयी ,मानो बिजली गरज गयी
ये संभव हे नहीं ,बस इतना कह कर चली गयी
क्या बात हम न समझ सके, न उनके मन की जान सके
तूफ़ान हमारे दिल का बेकरार हो गया

उफ़. ये कमाल हो गया....................

क्या प्यार करना है गुनाह? क्या हमने कोई पाप किया?
किसी दिल को दिल से चाहा? क्या हमने कोई हलाल किया?
क्यों उनकी आँखे है नम? क्या कोई हमें कोई समझाएगा?
क्या फिर दुनिया रोकेगी? क्या ये प्यार सिमट कर रह जाएगा?
उठ गये तूफ़ान मन में क्यों दिल आफ़ताब हो गया

उफ़ ये क्या हो गया................

कुछ समझ पाए उससे, पहले तानाकाशी होने लगी
दो परिवारो में हमारे, प्यार की अब चर्चाये होने लगी
क्यों गलत समझ कर हमको आवारा बना दिया
हमारे प्यार के सुन्दरता को बेदाग़ करके रख दिया

उफ़ ये क्या हो गया..................

आज हमारे प्यार पर ,ये केसी रोक लग गयी
एक झलक पाने को आज आँखे तरस गयी
हमारे ही परिवारों ने हमारे प्यार को
कलंक बना कर रख दिया
ये पाक प्रेम हमारा आज बदनाम होकर रह गया

उफ़ ये क्या हो गया .......................

Continued...

एक सिंह की सच्ची प्रेम कहानी (Part - IV)

क्यों कोई समझ न पाता हमने तो बस प्यार किया है
वो प्रेम जो कृष्ण ने राधे रानी से किया है
तन के रिश्ते भी क्या होते होंगे यहाँ तो मन मिल गया है
मन ने ही मन को अपना बनाकर रख दिया
उफ़ ये क्या हो गया ......
इस प्यार को कोई समझ नहीं पाया
हमने भी अपनी ख़ुशी को कुर्बा कर समझाया
प्रेम का ये समर्पण दिल ने कर दिया
पर आत्मा का प्रेम हमेशा ही छु गया
उफ़ ये क्या ही गया .....
ये दुआ करता हु वो तुम जहा भी रहो खुश रहो
तुम्हे जीवन में वो ख़ुशी मिले जो तुम चाहो
गम तुम्हारे जीवन में दूर दूर तक न रहें
क्यों आंसुओ से आज में बेताब हो गया
उफ़ ये क्या हो गया .....
जब तक जीवित हूँ ये दुआ करता रहूँगा
हर ख़ुशी हो तुम्हारे आँचल में हो ये कामना करता रहूँगा
जो मिले जीवन में साथी तुम्हे इतना प्यार दे
कभी सपने में भी तुम हमे याद न करे
तुम्हारी यादो से आज में दीवाना हो गया
उफ़ ये क्या हो गया ....